रायगढ़। खेतों में फसलों के अवशेष को जलाने पर एनजीटी के प्रतिबंध के बाद रायगढ़ जिले में इसे लेकर कार्ययोजना बनाई जा रही है। योजना के तहत जिले के 5 हजार हैक्टेयर खेतों में फसलों की पराली से खाद बनाई जाएगी। इसके लिए दिल्ली मॉडल को अपनाने की तैयारी की जा रही है। जिला कलेक्टर ने डीएमएफ फंड से इसके लिए एक करोड़ की राशि जारी की है। योजना के तहत फसलों के अवशेष में आर्गेनिक दवाओं का छिड़काव कर खाद बनाई जाएगी। खास बात ये है कि प्रदेश में रायगढ़ पहला जिला है जहां ये पहल की जा रही है।
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दरअसल एनजीटी ने बढते प्रदूषण को देखते हुए खेतों में फसलों के अवशेष को जलाने पर प्रतिबंध लगाया है। उत्तर भारत के राज्य पंजाब हरियाणा, दिल्ली में ये एक बड़ी समस्या है जिसकी वजह से इस पर पूरी तरह पाबंदी है। इसे देखते हुए हाल ही में दिल्ली सरकार ने इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्ट इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित बायो डिकंपोजर तकनीक को लागू किया है। इस तकनीक को पूसा इंस्टीट्यूट ने रिसर्च किया है और इसके व्यापक परिणाम भी सामने आए हैं।
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इसे देखते हुए रायगढ़ में भी इस मॉडल को अपनाया जा रहा है। जिला कलेक्टर ने जिले के 5 हजार हैक्टेयर में इसे प्रयोग के तौर पर लागू करने का निर्देश दिया है। योजना के तहत किसानों को कैप्सूल दिया जाएगा, जिसे फसलों की कटाई के बाद खेतों में छिड़काव किया जाएगा। सप्ताह भर के बाद खेतों में आर्गेनिक स्प्रे का छिड़काव किया जाएगा। जिससे फसल सड़कर खाद में तब्दील होगी। खास बात ये है कि दिल्ली के बाद छत्तीसगढ़ में रायगढ़ पहला शहर है जहां इस तकनीक को अपनाया जा रहा है। कलेक्टर का कहना है कि योजना सफल होती है तो आने वाले समय में इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा।
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