Contract Employees Regularization Latest News: कर्मचारियों को नियमितीकरण का इंतजार! सदन में गूंजा संविदा कर्मियों का मुद्दा, सरकार ने कहा- ‘भरे जाएंगे खाली पद’

Contract Employees Regularization Latest News: कर्मचारियों को नियमितीकरण का इंतजार! सदन में गूंजा संविदा कर्मियों का मुद्दा, सरकार ने कहा- 'भरे जाएंगे खाली पद' |

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  • Publish Date - March 25, 2025 / 10:40 AM IST,
    Updated On - March 25, 2025 / 10:40 AM IST
Contract Employees Regularization Latest News | Source : IBC24 File Photo

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HIGHLIGHTS
  • विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2024 की स्थिति में प्रदेश में 6 लाख 6 हजार नियमित कर्मचारी हैं।
  • खाली पदों पर आउटसोर्स और संविदा कर्मी काम कर ही रहे है।
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खाली पदों पर भर्ती के निर्देश दे चुके हैं।

भोपाल। Contract Employees Regularization Latest News: मध्यप्रदेश के सरकारी विभागों में नियमित अधिकारी-कर्मचारी लगातार रिटायर हो रहे हैं, लेकिन उस अनुपात में भर्तियां नहीं हो रही हैं। इस कारण प्रदेश के लगभग हर विभाग वर्कफोर्स की कमी से जूझ रहे हैं। नियमित कर्मचारियों की पूर्ति के लिए सरकार ने ठेके पर यानी आउटसोर्स पर कर्मचारियों को रखा है। इसका असर यह हो रहा है कि सरकारी कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में विधानसभा में पेश की गई शासकीय विभागों में नियोजन रिपोर्ट में प्रशासनिक ढांचे को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।

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Contract Employees Regularization Latest News : विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2024 की स्थिति में प्रदेश में 6 लाख 6 हजार नियमित कर्मचारी हैं, जबकि सरकार ने प्रथम श्रेणी से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक स्वीकृत पदों की संख्या 9 लाख से ज्यादा है। पिछले 9 सालों से पदोन्नति नहीं होने एवं दिव्यांग समेत अन्य आरक्षित पदों पर नियमित भर्ती नहीं होने ने मप्र सरकार का प्रशासनिक ढांचा बिगड़ता जा रहा है। मंत्रालय से लेकर निचले स्तर के सरकारी कार्यालय वर्कफोर्स (तृतीय, द्वितीय श्रेणी के अधिकारी एवं कर्मचारी) की कमी से जूझ रहे हैं।

खाली पदों पर होगी भर्ती

ऐसे में प्रदेश सरकार ने खाली पदों को भरने के लिए भर्ती का अभियान शुरू करने जा रही है, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खाली पदों पर भर्ती के निर्देश दे चुके हैं, जिसमें सभी विभागों में भर्ती होना है, इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग जानकारी जुटा रहा है,प्रदेश में नियमित कर्मचारियों के रिटायरमेंट के बाद प्रदेश में करीब तीन लाख नियमित पद खाली हैं।

ऐसे में विभागों को गोपनीय कार्य भी आउटसोर्स, कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए कर्मचारियों से करवाने पड़ रहे हैं। जिनकी वजह से सरकारी खजाने में करोड़ों रुपए की चपत लगाई जा चुकी है। 90 प्रतिशत गड़बडिय़ां कॉन्ट्रैक्ट के कर्मचारियों ने की है। प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार शासकीय विभागों में नियमित कर्मचारी 6 लाख 6 हजार हैं। जबकि सरकारी उपक्रमों में 33942, निकायों में 29966, ग्रामीण निकाय 5422, विकास प्राधिकरण 582, यूनिवर्सिटी में 4490 शासकीय सेवक हैं। ऐसे में सरकारी कर्मचारियों की संख्या 6 लाख 81 हजार होती है।

हालांकि इनमें कार्यभारित, आकस्मिक निधि से वेतन प्राप्त, दैनिक वेतनभोगी, कोटवार एवं संविदा कर्मचारी शामिल नहीं हैं, जिनकी संख्या 2 लाख 37 हजार है। सरकार के मंत्री दावा करते है कि नियमित पदों पर भर्तियां भी हो रही है और खाली पदों पर आउटसोर्स और संविदा कर्मी काम कर ही रहे है इसलिए वर्कफोर्स की कमी नहीं है। उधर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है।

1. क्या मध्यप्रदेश में सरकारी विभागों में कर्मचारी की कमी है?

हाँ, मध्यप्रदेश के सरकारी विभागों में नियमित कर्मचारियों की कमी है क्योंकि नियमित पदों पर भर्ती नहीं हो रही है और कई कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं। इसके कारण कई विभागों में वर्कफोर्स की कमी का सामना किया जा रहा है।

2. क्या राज्य सरकार भर्ती के लिए कोई कदम उठा रही है?

हाँ, राज्य सरकार ने खाली पदों को भरने के लिए भर्ती अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों में खाली पदों पर भर्ती के निर्देश दिए हैं, और सामान्य प्रशासन विभाग इस पर जानकारी जुटा रहा है।

3. क्या आउटसोर्स कर्मचारियों से सरकारी कार्यों की गुणवत्ता पर असर पड़ा है?

जी हां, आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति से सरकारी कार्यों की गुणवत्ता पर असर पड़ा है, क्योंकि कई बार इन कर्मचारियों की कार्य क्षमता और प्रतिबद्धता पर सवाल उठते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 90% गड़बड़ियाँ आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ी हुई हैं।

4. क्या आउटसोर्स कर्मचारी नियमित पदों में बदले जा सकते हैं?

आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया के बारे में अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि, कई बार इस विषय पर चर्चा होती रहती है, लेकिन इसे लेकर कोई अंतिम निर्णय अभी तक नहीं लिया गया है।