Electronic fridge fails in front of homegrown fridge of Shahgarh

शाहगढ़ के देसी फ्रिज के सामने फेल है इलेक्ट्रॉनिक फ्रिज, भीषण गर्मी में भी ​देते हैं मन को ठंडक

Electronic fridge fails in front of homegrown fridge of Shahgarh : शाहगढ़ के देसी फ्रिज के सामने फेल है इलेक्ट्रॉनिक फ्रिज, भीषण गर्मी में भी.

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Modified Date: November 29, 2022 / 08:21 PM IST
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Published Date: May 15, 2022 3:43 pm IST

Best Electric Fridge : रायपुर। झुलसा देने वाली गर्मी में सूखते गले को ठंडा पानी ही राहत दे सकता है। यह ठंडा पानी यदि घड़े का हो और वो भी सागर के शाहगढ़ में बने घड़े का तब तो ये पानी गले के साथ-साथ पूरे शरीर में तरावट ला देता है। हम बात कर रहे है सागर जिले के शाहगढ़ की जादुई मिट्टी से बनने वाले घड़ों की। जिसका पानी फ्रिज से भी ज्यादा ठंडा और शीतल होता है। इसी खूबी के चलते शाहगढ़ के घड़े सिर्फ सागर में ही नही बल्कि पूरे भारत मे मशहूर है।

सागर जिला मुख्यालय से सत्तर किलोमीटर दूर स्थित शाहगढ़ तहसील में बनाये जाने वाले घड़े बुंदेलखंड के साथ ही पूरे देश मे प्रसिद्ध है। यहां के घड़ों के फेमस होना का मुख्य कारण यही है कि यहां मिट्टी के बने घड़े फ्रिज से भी ज्यादा ठंडे होते हैं। इसलिए कहा जाता है कि शीतल और ठंडे पानी के मामलों में शाहगढ़ के घड़ों का कोई मुकाबला नहीं। न केवल सागर में बल्कि इसकी डिमांड पूरे देश में है।

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Best Electric Fridge : शाहगढ़ में शनिवार के दिन बाजार लगता है। इस दिन घड़ों की दुकानें अन्य दिनों की तुलना में ज्यादा दिखाई देती है। किसी भी क्षेत्र की खासियत उस वस्तु के विक्रेता, निर्माणकर्ता और उपयोगकर्ता के कारण होती है। शाहगढ़ के राजाराम प्रजापति अपनी किशोर अवस्था से ही मिट्टी के वर्तन बनाने का काम कर रहे हैं। अपनी पूरी जिंदगी में उन्होंने सबसे ज्यादा मिट्टी के घड़े ही बनाए हैं। पानी को अत्यधिक ठंडा और शीतल बनाये रखने वाले घड़े के गुण के बारे में राजाराम बताते है कि ‘यह कमाल शाहगढ़ की मिट्टी का है। यहां की मिट्टी रेत के कणों जैसी है इस कारण बारीक सरफेस टेंशन निर्मित होता है। जिस कारण से वेंटिलेशन का मार्ग बनता है और हवा घड़े में प्रवेश करती रहती है। जिससे पानी अत्यधिक ठंडा हो जाता है।’

बता दें सरफेस टेंशन बिल्कुल उसी तरह की काम करता है जिस तरह हमने कुछ दिन पहले मूर्तियों को पानी और दूध पीते देखा था। दरअसल रेत के कणों जैसे मिट्टी से बने घड़े में बारीक छिद्रों के माध्यम से हवा घड़े में अंदर प्रवेश करती है। पानी उन छिद्रों की वजह से घड़े के बाहरी परत को गीला करता है लेकिन लीक नहीं होता। हवा घड़े के बाहरी सतह से गुजरती हुई घड़े में भरे पानी तक पहुंचती है और पानी को ठंडा रखती है। शाहगढ़ की मिट्टी अन्य जगहों की मिट्टी से अलग है। यहां की मिट्टी ठोस और चिकनी होती है जो घड़े को मजबूरी तो देती है इसके साथ ही पानी को ठंडा भी करती है। इस कारण शाहगढ़ के घड़े पूरे देश में प्रसिद्ध हैं।

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