नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति बी आर गवई और पांच अन्य न्यायाधीश जातीय हिंसा से प्रभावित मणिपुर में राहत शिविरों का 22 मार्च को दौरा करेंगे।
मणिपुर में तीन मई 2023 को जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 200 से अधिक लोग मारे गए, सैकड़ों लोग घायल हुए और हजारों अन्य विस्थापित हुए।
नालसा ने कहा कि प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति गवई, शीर्ष अदालत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश, न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह के साथ मणिपुर उच्च न्यायालय के द्विवार्षिक समारोह के अवसर पर राहत शिविरों का दौरा करेंगे।
नालसा ने 17 मार्च को एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया, “तीन मई 2023 को शुरू हुई जातीय हिंसा के लगभग दो वर्ष बाद भी कई लोग मणिपुर में राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं।’’
नालसा ने बताया कि इस हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान चली गई और 50,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए।
नालसा के मुताबिक, न्यायाधीशों का दौरा इन प्रभावित समुदायों को कानूनी और मानवीय सहायता की निरंतर आवश्यकता को रेखांकित करता है।
प्राधिकरण ने बताया कि न्यायमूर्ति गवई इंफाल पूर्व, इंफाल पश्चिम और उखरुल जिलों में नए कानूनी सहायता केंद्रों के अलावा राज्य भर में कानूनी सेवा शिविरों और चिकित्सा शिविरों का डिजिटल माध्यम से उद्घाटन करेंगे।
नालसा के अनुसार, आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों को आवश्यक राहत सामग्री वितरित की जाएगी।
विज्ञप्ति में बताया गया, “हिंसा के बीच, नालसा ने मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एमएएसएलएसए) के साथ मिलकर प्रभावित समुदायों को कानूनी सहायता और सहयोग प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।”
विज्ञप्ति के मुताबिक, नालसा ने राहत शिविरों में 273 विशेष कानूनी सहायता केंद्र स्थापित किए हैं, जो विस्थापितों को सरकारी लाभ, खोए हुए दस्तावेज और चिकित्सा सहायता प्राप्त करने में सहायता करते हैं।
भाषा जितेंद्र सुभाष
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