नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) कार्यकर्ताओं और अकादमिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के एक समूह ने बुधवार को कहा कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के संबंध में विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किए गए लोगों को तत्काल छोड़ा जाना चाहिए और “असली दोषियों” को सजा देने के लिए एक न्यायिक जांच आयोग का गठन किया जाना चाहिए।
एक संयुक्त वक्तव्य में समूह के सदस्यों ने आरोप लगाया कि असहमत होने वालों की लोकतांत्रिक आवाज को धीरे-धीरे फंसाकर उन्हें दबाया जा रहा है।
यह वक्तव्य, जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को 13 सितंबर को दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद आया है।
खालिद पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज है।
लेखिका और तत्कालीन योजना आयोग की सदस्य सैयदा हमीद, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, वामपंथी नेता कविता कृष्णन, पत्रकार पामेला फिलिपोज और डियूटीए की पूर्व अध्यक्ष नंदिता नारायण की ओर से संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया है।
वक्तव्य में कहा गया, “असहमति की हर लोकतांत्रिक आवाज को धीरे-धीरे दबाया जा रहा है। इसमें छात्र, अकादमिक लोग, कलाकार, नेता और कार्यकर्ता शामिल हैं। हम इस जांच को तत्काल समाप्त करने की मांग करते हैं जो पूर्वाग्रह और दुर्भावना से ग्रसित है।”
वक्तव्य में कहा गया, “हम मांग करते हैं कि यूएपीए के तहत जिन कार्यकर्ताओं पर मामले दर्ज हैं उन्हें तत्काल छोड़ा जाना चाहिए और एक न्यायिक जांच आयोग का गठन किया जाना चाहिए ताकि दिल्ली में हिंसा के लिए जिम्मेदार असली दोषियों को सजा दी जा सके।”
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