नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) के खिलाफ दिवाला कार्यवाही की अपील करने वाली एक याचिका सोमवार को खारिज कर दी।
एक परिचालन लेनदार ने रोजमर्रा के सामान बनाने वाली कंपनी के खिलाफ दिवाला कार्यवाही शुरू करने की अपील करते हुए यह याचिका दायर की थी।
अपीलीय न्यायाधिकरण ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ द्वारा पारित आदेश को बरकरार रखा है। एनसीएलटी ने पांच सिंतबर, 2024 को ललिताम्बिका एंटरप्राइजेज के मालिक के लक्ष्मी नारायण की तरफ से ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवाला संहिता की धारा नौ के तहत दायर याचिका खारिज कर दी थी।
याची ने एचयूएल पर देनदारी के भुगतान में चूक का आरोप लगाया था।
एनसीएलटी ने पाया था कि चालान की राशि, जो तीन साल की सीमा अवधि के भीतर थी, एक करोड़ रुपये की निर्धारित सीमा से कम थी।
इसके अलावा अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि एचयूएल का जवाब पहले से मौजूद एक विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसके लिए 17 जनवरी, 2019 को एक कानूनी नोटिस जारी किया गया था।
एनसीएलएटी के प्रमुख न्यायमूर्ति अशोक भूषण और सदस्य (तकनीकी) अरुण बरोका की पीठ ने दावों पर विवाद के अस्तित्व को देखते हुए इसे खारिज कर दिया।
हालांकि, एनसीएलएटी ने कहा कि नारायण के लिए कानून में उपलब्ध अन्य उपायों को अपनाने का रास्ता खुला रहेगा।
एचयूएल और याची दोनों के बीच कारोबारी लेनदेन था और इनके चालान 2008 से 2018 की अवधि से संबंधित थे।
इसके साथ ही एनसीएलएटी ने परिचालन लेनदार के एमएसएमई होने के नाते 24 प्रतिशत की दर से ब्याज वसूलने का हकदार होने के नारायण के दावे को भी खारिज कर दिया।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)