मुंबई, छह अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई से प्रारंभिक जांच कराने के बंबई उच्च न्यायालय के आदेश खिलाफ मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की।
इससे पहले राज्य के गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटिल ने बताया था कि राज्य सरकार इस मामले में शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।
देशमुख ने सोमवार को महाराष्ट्र के गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था जब उच्च न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को मुंबई पुलिस के पूर्व प्रमुख परमबीर सिंह द्वारा उनपर लगाए गए आरोपों की प्रारंभिक जांच 15 दिन के भीतर करने के निर्देश दिए।
बाद में, राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने इस अहम विभाग की जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री एवं राकांपा नेता वलसे पाटिल को सौंप दी।
पाटिल ने मंगलवार को संवादाताओं से कहा कि राज्य सरकार मामले में जांच के लिए सीबीआई को हर मदद उपलब्ध कराएगी।
गौरतलब है कि 25 मार्च को सिंह ने देशमुख के खिलाफ सीबीआई जांच का अनुरोध करते हुए आपराधिक जनहित याचिका दाखिल की थी जिसमें उन्होंने दावा किया कि देशमुख ने निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे समेत अन्य पुलिस अधिकारियों को बार और रेस्तरां से 100 करोड़ रुपये की वसूली करने को कहा।
देशमुख ने इन आरोपों से इनकार किया है।
वलसे पाटिल ने कहा कि उन्होंने कठिन एवं चुनौतीपूर्ण वक्त में प्रमुख मंत्री पद की जिम्मेदारी स्वीकार की है और वह उनकी तरफ से “बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप” के साफ पुलिस प्रशासन सुनिश्चित करेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के चलते, पुलिस बल जमीन पर सक्रिय है। उनका कार्य कानून एवं व्यवस्था बरकरार रखना और कोविड-19 पाबंदियों को भी लागू करवाना है।”
उन्होंने कहा कि अप्रैल में, गुड़ी पड़वा, राम नवमी और महावीर जयंती और रमजान का पाक माह भी शुरू होगा।
उन्होंने कहा, “हर किसी की अलग-अलग उम्मीदें हैं। मेरा ध्यान आम आदमी पर होगा। नागरिकों को पुलिस बल पर भरोसा करना चाहिए।”
वलसे पाटिल ने कहा कि वह पुलिस बल को मजबूत एवं आधुनिक बनाने पर सेवारत वरिष्ठ अधिकारी एवं पूर्व पुलिस अधिकारियों से सलाह लेंगे।
भाषा
नेहा अनूप
अनूप
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