नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सिद्धार्थ सिंह लोंगजाम राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) के अगले महानिदेशक होंगे। वह नवीन अग्रवाल की जगह लेंगे।
लोंगजाम अभी खेल मंत्रालय में संयुक्त सचिव हैं और अभी निलंबित चल रही राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (एनडीटीएल) के सीईओ की भूमिका भी निभा रहे हैं।
भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी अग्रवाल ने 2016 में नाडा का प्रभार संभाला था और वह अब जम्मू एवं कश्मीर पुलिस में वापस जाएंगे।
अग्रवाल ने अपने कार्यकाल का आकर्षण देश के लगभग 60 एलीट खिलाड़ियों के खिलाड़ी जैविक पासपोर्ट (एबीपी) को तैयार करने को बताया। उन्होंने कहा कि यह डोपिंग के दंश को रोकने के लिए बड़ा कदम होगा।
एबीपी से समय के साथ खिलाड़ियों में जैविक बदलाव के निरीक्षण में मदद मिलती है जिससे डोपिंग के प्रभाव का पता चल सकता है।
अग्रवाल ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिन पीटीआई से कहा, ‘‘संभावित डोपिंग मामलों में एबीपी इकाई से काफी मदद मिलेगी। मुझे लगता है कि अभी 50 से 60 खिलाड़ी एबीपी के अंतर्गत हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ये सभी एलीट खिलाड़ी हैं और एबीपी ऐसे खेलों में इस्तेमाल किया जा रहा है जहां डोपिंग का असर प्रदर्शन पर पड़ता है। पदार्पण को सीमित समय में ही शरीर में पाया जाता है और लंबे समय में यह शरीर से गायब हो सकता है। ऐसे मामलों में इससे मदद मिलेगी।’’
अग्रवाल संतुष्ट है कि उनके कार्यकाल में बेहतर प्रणाली से रक्त डोपिंग की पहचान करने में मदद मिली।
वर्ष 2018 में भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) नाडा के अंतर्गत आया और अग्रवाल ने स्वीकार किया कि काफी समय पहले ऐसा हो जाना चाहिए था।
अग्रवाल ने हालांकि यह नहीं कहा कि यह नाडा में उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।
उन्होंने कहा, ‘‘ यह मेरे कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि नहीं थी लेकिन इसे काफी समय पहले हो जाना चाहिए था और ऐसा हो नहीं रहा था, कारण चाहे जो भी रहे हो। बीसीसीआई को डोपिंग रोधी दायरे में लाने के लिए निश्चित तौर पर काफी प्रयास करने पड़े।’’
अग्रवाल को साथ ही खुशी है कि नाडा का डोपिंग रोधी अनुशासनात्मक पैनल और डोपिंग रोधी अपील पैनल तेजी से मामलों का निपटारा कर रहा है।
भाषा सुधीर मोना
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