एशियाई चैंपियनशिप: अंतिम, दीपक के सामने फिर से खुद को साबित करने की चुनौती

एशियाई चैंपियनशिप: अंतिम, दीपक के सामने फिर से खुद को साबित करने की चुनौती

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  • Publish Date - March 24, 2025 / 05:06 PM IST,
    Updated On - March 24, 2025 / 05:06 PM IST

अम्मान (जॉर्डन), 24 मार्च (भाषा) अंतिम पंघाल और दीपक पूनिया जैसे पहलवानों के लिए 2024 का सत्र निराशाजनक रहा लेकिन इन दोनों के साथ भारत के अन्य पहलवानों को मंगलवार से यहां शुरू हो रही सीनियर एशियाई चैंपियनशिप में एक नयी शुरुआत करने का मौका मिलेगा।

युवा पहलवान अंतिम 2022-23 के बीच चयन ट्रायल को लेकर सुर्खियों में रही लेकिन वह वैश्विक मंच पर खुद को साबित करने में नाकाम रही। पेरिस ओलंपिक में वह पहले ही दौर से बाहर हो गयी।

ऐसा नहीं है कि वह पदक की प्रबल दावेदार थीं, लेकिन उनकी प्रतिभा को देखते हुए उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी। अंडर-20 विश्व चैंपियन के 53 किग्रा में दो बार चैंपियन रही अंतिम दबाव में बिखर गयी थी।

अंडर-23 विश्व चैंपियन रीतिका हुड्डा (76 किग्रा) और अंडर-17 विश्व चैंपियन मानसी लाठेर (जो 68 किग्रा चयन ट्रायल के माध्यम से चुनी गयी है) और मनीषा भानवाला (62 किग्रा) से बहुत उम्मीदें होंगी।

 विश्व चैंपियनशिप (2019) के रजत पदक विजेता दीपक पूनिया तोक्यो ओलंपिक में मामूली अंतर से पदक से चूक गए थे लेकिन वह पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने में भी नाकाम रहे।

दीपक ने जूनियर स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था लेकिन वह काफी समय तक खराब लय में रहे। उनके पास इस प्रतियोगिता से अपनी पिछली नाकामियों को पीछे छोड़कर खुद को फिर से साबित करने की चुनौती होगी।

सामान्य तौर पर 86 किग्रा में चुनौती पेश करने वाले दीपक यहां 92 किग्रा वर्ग में अपने कौशल को आजमायेंगे।

पेरिस खेलों के कांस्य पदक विजेता अमन सहरावत पदक के लिए बड़े दावेदार होते, लेकिन वह चोट से पूरी तरह से उबरने में नाकाम रहे है ऐसे में अंडर-23 विश्व चैंपियन चिराग 57 किग्रा वर्ग में भारत की चुनौती पेश करेंगे। इस भार वर्ग के मुकाबलों को तेज गति के लिए जाना जाता है।

उदित (61 किग्रा) और विश्व अंडर-20 पदक विजेता सुजीत कलकल (65 किग्रा) से भी भारतीय टीम को प्रभावी प्रदर्शन की उम्मीद है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत के ग्रीको रोमन पहलवानों ने अपने खेल के स्तर को ऊंचा किया है। राष्ट्रीय शिविर और प्रतियोगिताओं के अभाव में हालांकि उनको लेकर ज्यादा कयास नहीं लगाये जा सकते। इसमें अगर एक-दो पहलवान पदक जीतने में सफल रहे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।

भारतीय टीम:

पुरुष फ्रीस्टाइल: चिराग (57 किग्रा), उदित (61 किग्रा), सुजीत कलकल (65 किग्रा), विशाल कालीरमन (70 किग्रा), जयदीप (74 किग्रा), चंद्रमोहन (79 किग्रा), मुकुल दहया (86 किग्रा), दीपक पूनिया (92 किग्रा), जोंटी कुमार (97 किग्रा) और दिनेश (125 किग्रा)।

महिला: अंकुश (50 किग्रा), अंतिम पंघाल (53 किग्रा), निशु (55 किग्रा), नेहा शर्मा (57 किग्रा), मुस्कान (59 किग्रा), मनीषा भनवाला (62 किग्रा), मोनिका (65 किग्रा), मानसी लाठेर (68 किग्रा), ज्योति बेरवाल (72 किग्रा) और रीतिका हुडा (76 किग्रा)

ग्रीको रोमन: नितिन (55 किग्रा), सुमित (60 किग्रा), उमेश (63 किग्रा), नीरज (67 किग्रा), कुलदीप (72 किग्रा), सागर (77 किग्रा), राहुल (82 किग्रा), सुनील (87 किग्रा), नितेश (97 किग्रा) और प्रेम (130 किग्रा)।

भाषा आनन्द नमिता

नमिता