Buddh uday 2023
रायपुर: This Zodiac Sign Luck Will Change ज्योतिष के अनुसार हर ग्रह समयानुसार राशि बदलते रहते हैं। कुछ सीधे तो कुछ विपरीत अवस्था में इसी अवस्था को ज्योतिष में वक्री व सीधे अवस्था को मार्गी कहा गया है। जिसे हम गोचर तथा राशि परिवर्तन के नाम से जानते हैं। कहा गया है। जिसे हम गोचर तथा राशि परिवर्तन के नाम से जानते हैं।
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This Zodiac Sign Luck Will Change वैदिक ज्योतिष में बुध का प्रभावी होना वैदिक ज्योतिष के अनुसार यदि किसी जातक की कुंडली में बुध शुभ स्थिति में है तो उस जातकों अच्छे परिणाम मिलते हैं। जातक का वाणी काफी प्रभावित करने वाला होता है। इसके साथ ही जातक जो भी कहता है उसका प्रभाव श्रोता पर अधिक पड़ता है। इसके साथ ही जातक तार्किक बनाता है। जातक की मानसिक शक्ति मजबूत होती है। जातक अपने फैसले लेने में सक्षम होता है। ऐसे में बुध का वक्री होकर शुभ स्थिति में होना जातक के लिए शुभ परिणाम देने वाला बन जाएगा।
मंगल की राशि मेष में बुध ग्रह वक्री होंगे। बुध ग्रह 21 अप्रैल 2023 को दोपहर 1 बजकर 25 मिनट पर व्रकी होंगे। इससे एक दिन पहले यानि की आज 2023 का पहला सूर्य ग्रहण 20 अप्रैल को सुबह 07 बजकर 05 मिनट पर लगेगा। यह ग्रहण दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगा। यह ग्रहण वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को लगेगा। यह ग्रहण अश्विनी नक्षत्र में मेष राशि में लगेगा। सूर्य ग्रहण का सूतक काल सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है।
हालांकि सूतक काल तभी मान्य होता है जब ग्रहण दिखाई देता है। 20 अप्रैल को लगने वाला ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए यहां सूतक काल भी नहीं माना जाएगा। इस दौरान मंदिर के कपाट बंद नहीं होंगे और सभी धार्मिक कार्य किए जा सकेंगे। इस प्रकार सूर्य ग्रहण और उसके बाद बुध का वक्री होना दोनो की मेष राशि को सबसे पहले प्रभावित करेगा। इस प्रकार इस दो प्रमुख घटनाओ का क्या होगा विभिन्न राशि वालो पर प्रभाव, आईये उस पर बात करते हैं। 12 भाव के मुताबिक देखा जाए तो वक्री बुध का प्रभाव अलग- अलग होता है।
मेष राशि –
12 भाव के मुताबिक देखा जाए तो वक्री बुध का प्रभाव अलग – अलग होता है। पहले भाव में वक्री बुध का विराजमान होना जातक के लिए सही नहीं माना जाता है। लेकिन वक्री बुध होने से ऐसे में जातक गलत फैसले कर बैठता है जिससे उसे हानि का सामना करना पड़ सकता है।
मिथुन राशि –
कुंडली के तीसरे भाव में वक्री बुध का होना जातक को निर्भिक बनाता है। जातक के आत्मबल में वृद्धि करता है। जातक जोखिम भरे कार्यों को करने में अधिक रूचि दिखाता है।
कर्क राशि –
बुध का वक्री होकर कुंडली के चौथे भाव भाव में विराजना जातक के लिए धन लाभ की संभवना बनाता है। लेकिन जातक विलासता के साथ जीवन भी यापन करने में लिप्त हो सकता है।
तुला राशि –
कुंडली के सांतवे भाव में बुध का वक्री होकर बैठना जातक के जीवन में आकर्षक साथी के आने व प्राप्त होने की ओर संकेत करता है। ऐसे जातक को खूबसूरत जीवनसाथी मिलती है।
मकर राशि –
दशम भाव में बुध का वक्री होकर विराजना जातक को पैतृक संपत्ती में लाभ दिलवाता है। गरीबी का मूंह नहीं देखना पड़ता है। किंतु दशम भाव में वक्री बुध होने से लाभ में कमी एवं अधिकारी तथा पिता से मतभेद के कारण तनाव का कारण होगा।