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Big Picture with RKM: रायपुर : कुछ ही महीने पहले देश में लोकसभा के चुनाव संपन्न हुए। इस चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए देश की निर्वाचन प्रशासन, सरकारी मशीनरी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। हर चुनावों की तरह इस पर काफी खर्च भी हुआ। बात मतदाताओं की करें तो वह भी चुनावों में घर से बाहर आये, उन्होंने मतदान किया। इस उम्मीद के साथ की वह एक आदर्श नेता यानी सांसद का चुनाव करेंगे। वह सांसद उनके लोकतंत्र के सबसे बड़ी मंदिर, देश की सबसे बड़ी पंचायत में उनके अधिकारों के लिए लड़ेंगे, उन्हें न्याय दिलाएंगे। पक्ष के गए तो उनकी सुविधाएं बढ़ेंगी और विपक्ष में बैठें तो उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ी जाएगी। लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ होता नजर नहीं आ रहा है।
संसद में ही विपक्ष और पक्ष के बीच बहस में संसदीय परम्पराओं को तोड़ा जा रहा हैं। सांसद असंसदीय भाषाओं का प्रयोग कर रहे हैं। देश के सांसदों को अब जब बजट पर गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए थी तो ऐसे में उनके बहस की दिशा ने कोई और मोड़ ले लिया हैं। कुल मिलाकर पार्लियामेंट में वह नहीं हो रहा जो होना चाहिए। और इससे देश के मतदाता, प्रबुद्धजन और युवा निराश हैं।
Big Picture with RKM: लेकिन यह मर्यादाहीनता सिर्फ सांसदों के बीच या सांसदों के प्रति ही नहीं है। पिछली बार और उससे पहले भी देखा गया है कि जब कभी देश के प्रधानमंत्री किसी गंभीर मुद्दे पर चर्चा के लिए खड़े होते हैं, उन्हें बोलने नहीं दिया जाता। रोक-टोक किया जाता है, शोर मचाया जाता हैं। इस बार भी राष्ट्रपति के धन्यवाद प्रस्ताव पर जब पीएम संसद पर बोलने खड़े हुए तब भी विपक्ष ने पुराना रवैय्या अपनाया और उनके सम्बोधन में बाधा बनने की कोशिश की। खुद प्रधानमंत्री ने भी इस पर निराशा जाहिर की।
संसद के भीतर यह भी देखा जा रहा हैं कि सांसद ही मुद्दों को भटकाने में लगे रहते है। वे निजी टीका-टिपण्णी करते हैं। जबकि उन्हें इस समय संसद के भीतर उन्हें सरकार के पेश किये गए बजट पर गंभीरता से बहस और चर्चा करनी चाहिए। उस बजट की अच्छी-बुरी बातों को सरकार के सामने रखना चाहिए। इस हंगामे का परिणाम यह होता हैं कि सदन के स्पीकर संसदीय कार्रवाई को स्थगित करने पर मजबूर हो जाते हैं।
इन सबसे अलावा अगर हम नुकसान की बात करें तो संसद की कार्रवाई के एक दिन का खर्च करीब 15 करोड़ रुपये होता हैं जोकि एक हर करदाता का नुकसान हैं। लेकिन सवाल सिर्फ आर्थिक नुकसान का नहीं हैं। प्रश्नकाल से लेक शून्यकाल और संसद के अलग-अलग कार्रवाही के चरण जिस पर तमाम तरह की बहस, कानूनों का निर्माण, गंभीर विषयों पर चर्चाएं संपन्न होती हैं वह इस हंगामे और शोर-शराबे की भेंट चढ़ जाता हैं।
Big Picture with RKM: मैं बेहतर संचालन के लिए निर्धारित नियम और आदर्श संसदीय कार्रवाई के लिए छत्तीसगढ़ की विधानसभा को आदर्श मानता हूँ। छत्तीसगढ़ के विधानसभा में होने वाली शांति पूर्ण, धीर-गंभीर बहस और इससे मिलने वाले सुखद परिणाम न सिर्फ अन्य राज्यों के विधानसभा के लिए बल्कि संसद के लिए भी आदर्श स्थापित करते हैं। निर्बाध और संसदीय कार्रवाई के लिए बनायें गए नियम बताते हैं कि सबसे बड़ी पंचायतो की सबसे बड़ी जिम्मेदारी क्या होती हैं। यह हर जनप्रतिनिधि के कर्तव्यों का बोध कराता हैं। जन के मन में लोकतंत्र के प्रति विश्वास को बढ़ाता हैं। ऐसे में न सिर्फ आया राज्यों को बल्कि खुद देश की संसद को भी छत्तीसगढ़ विधानसभा से अच्छी चीजे आत्मसात करनी चाहिए।