CG News: छत्तीसगढ़ में 24 घंटे खुली रह सकती हैं दुकानें, कर्मचारियों को मिलेगा साप्ताहिक अवकाश, छोटे दुकानदारों को राहत |

CG News: छत्तीसगढ़ में 24 घंटे खुली रह सकती हैं दुकानें, कर्मचारियों को मिलेगा साप्ताहिक अवकाश, छोटे दुकानदारों को राहत

Shops can remain open 24 hours in Chhattisgarh: पुरानी व्यवस्था में दुकानों को सप्ताह में एक दिन बंद रखना अनिवार्य था। अब दुकानें 24 घंटे और पूरे सप्ताह खुली रह सकती हैं, बशर्ते कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश दिया जाए। नई व्यवस्था के तहत, कुछ सुरक्षा शर्तों के साथ महिला कर्मचारियों को रात में भी काम करने दिया जाएगा।

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Modified Date: February 18, 2025 / 10:50 PM IST
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Published Date: February 18, 2025 10:47 pm IST
HIGHLIGHTS
  • पुराना अधिनियम 1958 और नियम 1959 निरस्त
  • छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना (नियोजन एवं सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 2017 और नियम 2021 पूरे राज्य में लागू

रायपुर: CG latest News, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार ने छोटे दुकानदारों को राहत और कर्मचारियों के अधिकारों के संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना (नियोजन एवं सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 2017 और नियम 2021 को पूरे राज्य में लागू कर दिया है। इसके साथ ही पुराना अधिनियम 1958 और नियम 1959 को निरस्त कर दिया गया है।

Chhattisgarh Shops and Establishments (Regulation of Employment and Conditions of Service) Act; श्रम विभाग के अनुसार, नया अधिनियम पूरे राज्य में लागू होगा, जबकि पुराना अधिनियम केवल नगरीय निकाय क्षेत्रों में प्रभावी था। इस बदलाव से छोटे दुकानदारों को राहत मिलेगी, क्योंकि नया कानून केवल 10 या अधिक कर्मचारियों वाली दुकानों और स्थापनाओं पर ही लागू होगा। पहले, बिना किसी कर्मचारी के भी सभी दुकानें अधिनियम के दायरे में आती थीं।

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नए नियमों के तहत, दुकान और स्थापनाओं के पंजीयन शुल्क को कर्मचारियों की संख्या के आधार पर तय किया गया है। न्यूनतम शुल्क 1,000 रुपये और अधिकतम 10,000 रुपये होगा। पहले यह शुल्क 100 रुपये से 250 रुपये तक था। श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि नए अधिनियम के लागू होने के 6 महीने के भीतर सभी पात्र दुकानों और स्थापनाओं को पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। यह प्रक्रिया श्रम विभाग के पोर्टल shramevjayate.cg.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन पूरी की जा सकेगी।

कर्मचारी राज्य बीमा और भविष्य निधि में पहले से पंजीकृत दुकानें नए अधिनियम में स्वतः शामिल होंगी। पहले से पंजीकृत दुकानों को 6 महीने के भीतर श्रम पहचान संख्या प्राप्त करने के लिए आवेदन करना होगा, लेकिन इसके लिए उन्हें कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। यदि 6 महीने बाद आवेदन किया जाता है, तो नियमानुसार शुल्क देना अनिवार्य होगा।

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पुरानी व्यवस्था में दुकानों को सप्ताह में एक दिन बंद रखना अनिवार्य था। अब दुकानें 24 घंटे और पूरे सप्ताह खुली रह सकती हैं, बशर्ते कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश दिया जाए। नई व्यवस्था के तहत, कुछ सुरक्षा शर्तों के साथ महिला कर्मचारियों को रात में भी काम करने दिया जाएगा। सभी नियोजकों को अपने कर्मचारियों के रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक रूप से मेंटेन करने होंगे। हर साल 15 फरवरी तक सभी दुकान एवं स्थापनाओं को अपने कर्मचारियों का वार्षिक विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना होगा। नए अधिनियम में जुर्माने की राशि बढ़ाई गई है, लेकिन अपराधों के कम्पाउंडिंग की सुविधा दी गई है, जिससे नियोजकों को कोर्ट की कार्रवाई से बचने का विकल्प मिलेगा। निरीक्षकों की जगह फैसिलिटेटर और मुख्य फैसिलिटेटर नियुक्त किए जाएंगे, जो व्यापारियों और नियोजकों को बेहतर मार्गदर्शन देंगे।

पहले दुकान और स्थापनाओं का पंजीयन कार्य नगरीय निकायों द्वारा किया जाता था। अब 13 फरवरी 2025 की अधिसूचना के अनुसार यह कार्य श्रम विभाग द्वारा किया जाएगा। नए नियमों से छोटे दुकानदारों को राहत मिलेगी, पंजीयन प्रक्रिया सरल होगी और कर्मचारियों के अधिकारों का बेहतर संरक्षण किया जा सकेगा।

1. नए अधिनियम के तहत दुकानों और स्थापनाओं के लिए पंजीयन की प्रक्रिया क्या होगी?

सभी पात्र दुकानों और स्थापनाओं को 6 महीने के भीतर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। यह प्रक्रिया श्रम विभाग के पोर्टल shramevjayate.cg.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन पूरी की जा सकेगी। पहले से पंजीकृत दुकानों को श्रम पहचान संख्या (LIN) प्राप्त करने के लिए आवेदन करना होगा।

2. क्या सभी दुकानों पर यह अधिनियम लागू होगा?

नहीं, यह अधिनियम केवल उन दुकानों और स्थापनाओं पर लागू होगा जहां 10 या अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। पहले, बिना किसी कर्मचारी के भी सभी दुकानें अधिनियम के दायरे में आती थीं, लेकिन अब छोटे दुकानदारों को राहत दी गई है।

3. क्या दुकानें अब 24 घंटे खुली रह सकती हैं?

हां, दुकानें 24 घंटे और पूरे सप्ताह खुली रह सकती हैं, लेकिन इसके लिए कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश देना अनिवार्य होगा। महिला कर्मचारियों को कुछ सुरक्षा शर्तों के साथ रात में काम करने की अनुमति होगी।

4. नए अधिनियम के तहत पंजीयन शुल्क कितना होगा?

पंजीयन शुल्क कर्मचारियों की संख्या के आधार पर तय किया गया है। न्यूनतम शुल्क ₹1,000 और अधिकतम ₹10,000 होगा। पहले यह शुल्क ₹100 से ₹250 तक था।