नई दिल्ली। निपाह वायरस(एनआईवी) फैलने के बाद केरल में लोग खौफ में जी रहे हैं। कोझिकोड में इस वायरस के कारण अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6 लोगों की हालत नाजुक है। वहीं वायरस से प्रभावित 25 लोगों को सघन निगरानी में रखा गया है। स्थित यह है कि लोग मास्क पहनकर घूम रहे हैं।
राज्य का पशुपालन विभाग चमगादड़ पकड़ने के लिए कुएं और पेड़ों पर जाल लगा रहे हैं। केरला स्वास्थ संचालक डॉ. आरएल सरिता के मुताबिक जिस परिवार के तीन लोगों की मौत निपाह वायरस से हुई है, उनके घर के आसपास और पेड़ों पर कई चमगादड़ मिले हैं। कई फलों और पेड़ों में भी निपाह वायरस मिला है।
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जानकारों की मानें तो यह वायरस भारत में सबसे पहले पश्चिम बंगाल में मिला था। 2001 में प. बंगाल के सिलिगुड़ी में निपाह वायरस का संक्रमण फैला था। तब 66 केस सामने आए थे और इसके चलते 45 लोगों की मौत हुई थी। वहीं पड़ोसी देश बांग्लादेश में वर्ष 2004 में फ्रूट बैट द्वारा संक्रमित किए गए खजूर खाने से भी लोग इसकी चपेट में आए थे।
यह वायरस फिर दोबारा 2007 में भारत लौटा। तब बंगाल के नदिया जिले में इसके संक्रमण से 5 लोगों की मौत हुई थी। बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने निपाह वायरस सामने आने के बाद एनसीडीसी की एक टीम केरल भेजी है। साथ ही, केरल का स्वास्थ्य विभाग भी इससे निपटने में जुटा हुआ है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अब तक इस वायरस से जुड़ी कोई वैक्सीन नहीं आई है। फिलहाल इससे बचाव के लिए कुछ सावधानियां बरतने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। जैसे कि फलों, खासकर खजूर खाने से बचना चाहिए। पेड़ से गिरे फलों को नहीं खाना चाहिए। बीमार सुअर और दूसरे जानवरों से दूर रहना चाहिए।
इस वायरस से प्रभावित लोगों को सांस लेने की दिक्कत होती है। फिर दिमाग में जलन महसूस होती है। वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर मौत हो जाती है।
वेब डेस्क, IBC24