कूड़ममाणिक्य मंदिर में जातिगत भेदभाव को लेकर हमारा रुख सख्त : केरल सरकार |

कूड़ममाणिक्य मंदिर में जातिगत भेदभाव को लेकर हमारा रुख सख्त : केरल सरकार

कूड़ममाणिक्य मंदिर में जातिगत भेदभाव को लेकर हमारा रुख सख्त : केरल सरकार

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Modified Date: March 10, 2025 / 09:49 PM IST
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Published Date: March 10, 2025 9:49 pm IST

तिरुवनंतपुरम/त्रिशूर, 10 मार्च (भाषा) केरल के देवस्वओम मंत्री वी. एन. वासवन ने त्रिशूर जिले स्थित कूड़ममाणिक्य मंदिर में कथित जातिगत भेदभाव पर सरकार के रुख को सोमवार को स्पष्ट करते हुए कहा कि मंदिर में नियुक्त किए गए पिछड़े समुदाय के व्यक्ति को वहां काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए क्योंकि मौजूदा अधिनियमों और नियमों के अनुसार ही उसे नियुक्त किया गया है।

वासवन ने केरल विधानसभा में वित्तीय कामकाज पर चर्चा के दौरान कहा कि जातिगत भेदभाव के आधार पर नौकरी देने से इनकार करना केरल के सांस्कृतिक समाज के लिए अपमान की बात है।

मंत्री ने बताया कि मंदिर में बालू नामक एक कर्मचारी को ‘कझकम’ के पद पर नियुक्त किया गया था और वह अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए मंदिर पहुंचा था, लेकिन ‘तंत्रियों’ (मुख्य पुजारियों) ने देवस्वओम बोर्ड के पास शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने शिकायत में कहा कि अगर बालू को काम करने की अनुमति दी गई तो वे अपनी ‘तंत्री’ जिम्मेदारियों को निभाने से परहेज करेंगे।

कूड़ममाणिक्य मंदिर की ‘प्रतिष्ठा वर्षिकम’ के अवसर पर यह एक बड़ा मुद्दा बन गया। इसके बाद, बोर्ड के अधिकारियों ने उक्त कर्मचारी को अस्थायी रूप से कार्यालय की ड्यूटी पर तैनात कर दिया।

वासवन ने बताया, ‘‘एझावा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले बालू को मौजूदा अधिनियमों और नियमों के अनुसार ही नियुक्त किया गया है, इसलिए उन्हें काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए।’’

उन्होंने बताया कि मंदिर में ‘कझकम’ के लिए दो पद हैं, जिसमें एक की नियुक्ति ‘तंत्रियों’ द्वारा की जाती है और दूसरे की नियुक्ति अधिनियमों और विनियमों के अनुसार की जाती है।

मंदिर में ‘कझगम’ पारंपरिक रूप से माला बनाने और सजावट के काम के लिए जिम्मेदार होता है।

वासवन ने कहा कि इस मुद्दे से पता चलता है कि लोगों के मन में अब भी छुआछूत और अनैतिक प्रथाएं हैं। उन्होंने कहा कि जाति के आधार पर नौकरी देने से इनकार करना अत्यंत निंदनीय है।

इरिन्जालाकुडा में स्थित यह प्राचीन मंदिर है और केरल में भगवान राम के तीसरे भाई भगवान भरत को समर्पित कुछ मंदिरों में से एक है।

इससे पहले, केरल राज्य मानवाधिकार आयोग (केएसएचआरसी) ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए इसके जांच के आदेश दिए थे।

केएसएचआरसी ने एक बयान में कहा कि आयोग की सदस्य वी. गीता ने कोचीन देवस्वओम आयुक्त और कूड़ममाणिक्य के कार्यकारी अधिकारी को जांच कर दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

विभिन्न मीडिया चैनल में इस घटना के सामने आने के बाद इसके जांच के आदेश दिए गए हैं। मीडिया की खबर के मुताबिक बालू ने देवस्वओम भर्ती बोर्ड की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ‘कझकम’ का पद हासिल किया था, लेकिन तंत्रियों (मुख्य पुजारियों) द्वारा विरोध जताने के बाद उसे दूसरी जिम्मेदारी दी गई।

मंदिर प्रशासन ने कहा कि तंत्री मंदिर के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकते और देवस्वओम भर्ती बोर्ड द्वारा की गई नियुक्ति में बदलाव नहीं किया जा सकता। प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि यदि तंत्रियों को कोई आपत्ति है तो वे कानूनी उपाय अपना सकते हैं।

तंत्री समाजम और वारियर समुदाय के नेताओं ने जातिगत भेदभाव के आरोपों को खारिज किया है।

भाषा

प्रीति धीरज

धीरज

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)