नई दिल्ली: आयकर रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई नजदीक आ रही है। तमाम कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को फॉर्म-16 भी जारी कर दिया है। फॉर्म-16 एक तरह का सर्टिफिकेट होता है, जिसमें टैक्स की सारी जानकारी होती है। अगर आपने किसी साल में एक से अधिक कंपनियों में काम किया है तो आपके पास उतने फॉर्म-16 होंगे।>>*IBC24 News Channel के WhatsApp ग्रुप से जुड़ने के लिए Click करें*<<
तमाम कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को 15 जून तक ही फॉर्म-16 भी जारी कर दिए हैं। इसकी मदद से तमाम कर्मचारी अपना आईटीआर फाइल कर सकते हैं। जो लोग काफी पहले से आईटीआर भरते आ रहे हैं, उन्हें तो फॉर्म-16 के बारे में अच्छे से पता होगा, लेकिन जिन्होंने हाल ही में नौकरी शुरू की है या फिर जो अब जाकर टैक्स के दायरे में आए हैं, उन्हें फॉर्म-16 के बारे में कई बातें पता होनी चाहिए।
फॉर्म-16 किसी की कंपनी की तरफ से कर्मचारियों को जारी किया जाता है। इसमें कर्मचारी की सैलरी पर काटे गए टैक्स की सारी जानकारी होती है। वहीं अगर कर्मचारी ने एचआरए या तमाम तरह के निवेश कर के टैक्स बचाया है, तो उसकी जानकारी भी फॉर्म-16 में होती है। यानी सीधे-सीधे कहें तो फॉर्म-16 किसी कर्मचारी की सैलरी पर टैक्स की गणना का सर्टिफिकेट होता है। इस प्रमाणपत्र को कंपनियों की तरफ से सरकार के पास भी जमा कराया जाता है।
देखिए कितने पार्ट में भरी जाती है फॉर्म 16?
फॉर्म 16 के पहले पार्ट में वेतन पर काटे गए टैक्स की जानकारी होती है। इसे नियोक्ता की तरफ से ट्रेसेज पोर्टल से जेनेरेट और डाउनलोड किया जाता है। फॉर्म 16 के पहले पार्ट में नियोक्ता का नाम और पता, नियोक्ता का पैन (स्थायी खाता संख्या), टैन और कर्मचारी का पैन आदि होते हैं। इसके अलावा कर्मचारी के संबंध में उल्लेखित भुगतान या क्रेडिट की गई राशि और स्रोत पर टैक्स कटौती की समरी होते हैं।
फॉर्म-16 का दूसरा पार्ट कर्मचारियों के लिए बहुत अहम हिस्सा होता है। इसी में टैक्स से लेकर तमाम डिडक्शन की सारी जानकारियां होती हैं। इस हिस्से में आपकी सैलरी का विस्तृत विवरण होता है। इसके अलावा धारा 10 के तहत छूट की सीमा तक के भत्ते की जानकारी होती है। इसके अलावा आयकर अधिनियम के चैप्टर VI-A के तहत अनुमति प्राप्त कटौती और धारा 89 के तहत राहत की जानकारी होती है।
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