अहमदाबाद, 29 अक्टूबर (भाषा) गुजरात में भाजपा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल का बृहस्पतिवार को यहां निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थे।
परिवार के सदस्यों ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि पटेल हाल ही में कोविड-19 से उबरे थे। बृहस्पतिवार की सुबह स्वास्थ्य संबंधी कुछ परेशानियों के चलते उन्हें अहमदाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पटेल 92 वर्ष के थे। वह 1995 और फिर 1998 से 2001 के बीच राज्य के मुख्यमंत्री रहे। उनके बाद नरेन्द्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री बने थे।
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने संवाददाताओं को बताया कि राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को एक दिन का शोक घोषित किया है। उन्होंने कहा कि पूरे राजकीय सम्मान के साथ केशुभाई का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि हृदयाघात से केशुभाई पटेल की मौत हुई ।
केशुभाई के पुत्र भरत पटेल ने पत्रकारों से कहा, ‘‘आज सुबह तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर हम उन्हें अस्पताल ले गए। हाल ही में वह कोरोना वायरस से उबर गए थे, लेकिन संक्रमण से उनके शरीर पर पड़े प्रभाव के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी।’’
सत्तारूढ़ भाजपा ने पटेल की मौत के बाद रैलियों समेत उपचुनाव से संबंधित सभी कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया।
गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा, ‘‘केशुभाई के सम्मान में आज सभी सरकारी कामकाज को रोक दिया गया।’’
रूपाणी भी गढ़दा में चुनावी रैली से लौट आए और गांधीनगर में केशुभाई के आवास पर गए।
रूपाणी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘वह गुजरात में भाजपा के भीष्म पितामह की तरह थे। उनके पास जबरदस्त सामाजिक-राजनीतिक कौशल था। वह कम बोलते थे लेकिन उनका एक एक शब्द भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए मायने रखता था।’’
रूपाणी ने कहा, ‘‘किसान होने के नाते केशुभाई ने उनके कल्याण के काम किए । हमने उनके निधन पर शोक जताने के लिए राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया।’’
पटेल छह बार गुजरात विधानसभा के सदस्य रहे। साल 2012 में भाजपा छोड़ने के बाद उन्होंने ‘गुजरात परिवर्तन पार्टी’ बनाई, जिसने 2012 में राज्य के विधानसभा चुनाव में बेहद खराब प्रदर्शन किया। इसके बाद 2014 में उन्होंने अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया।
जूनागढ़ जिले के विसावदर शहर में 1928 में जन्मे पटेल 1945 में बतौर प्रचारक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हुए। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बतौर जन संघ कार्यकर्ता के तौर पर की थी।
पटेल ‘सोमनाथ ट्रस्ट’ के अध्यक्ष भी थे, जो सौराष्ट्र क्षेत्र में प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर का प्रबंधन करता है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई अन्य नेताओं ने केशुभाई पटेल के निधन पर शोक प्रकट किया।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट किया, ‘‘केशुभाई पटेल के निधन से, राष्ट्र ने एक महान नेता खो दिया। उनका लंबा सार्वजनिक जीवन लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए समर्पित रहा, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। उन्होंने किसानों के हितों की रक्षा की, लोगों के साथ उनका अद्भुत संबंध था।’’
प्रधानमंत्री ने सिलसिलेवार ट्वीट किए और केशुभाई के साथ अपनी कुछ तस्वीरें साझा कीं।
प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘हमारे प्रिय और माननीय केशुभाई के निधन से मैं बेहद दुखी हूं। वह एक बेहतरीन नेता थे, जिन्हें समाज के हर तबके की चिंता थी। उनका जीवन गुजरात के विकास और गुजरातियों को सशक्त बनाने की दिशा में समर्पित था।’’
मोदी ने कहा, ‘‘केशुभाई ने जनसंघ और भाजपा को मजबूत करने के लिए गुजरात के कोने-कोने की यात्रा की। उन्होंने पूरी ताकत के साथ आपातकाल का प्रतिरोध किया। किसानों के कल्याण का मुद्दा उनके दिल से जुड़ा था। चाहे विधायक हों या सांसद, मंत्री या मुख्यमंत्री, हर भूमिका में उन्होंने किसानों के अनुकूल कदम उठाए । ’’
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला समेत कई नेताओं ने केशुभाई को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी।
गुजरात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन मोढवादिया और प्रदेश कांग्रेस प्रमुख अमित चावडा ने भी केशुभाई को श्रद्धांजलि दी ।
भाषा आशीष मनीषा
मनीषा
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