किसानों के समर्थन में सीएम केजरीवाल कल रखेंगे उपवास, किसानों ने किया है 14 दिसंबर को एकदिवसीय उपवास का ऐलान

किसानों के समर्थन में सीएम केजरीवाल कल रखेंगे उपवास, किसानों ने किया है 14 दिसंबर को एकदिवसीय उपवास का ऐलान

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  • Publish Date - December 13, 2020 / 11:19 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:13 PM IST

नई दिल्ली: मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन लगातार जारी है। किसानों का जत्था पिछले 18 दिनों राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीमा पर डटा हुआ है। किसानों ने 14 दिसंबर को एक दिवसीय उपवास करने का ऐलान किया है। वहीं, किसानों के समर्थन में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी एक दिन का उपवास करने का ऐलान किया है।

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सीएम केजरीवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि मैं भी कल कसानों के साथ एक दिन का उपवास रखूंगा। साथ ही उन्होंने अपील की है देश की जनता से कि किसानों के समर्थन में सब लोग एक दिन का उपवास रखें। मैं आम आदमी पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील करता हूं कि वो भी किसानों की इन मांगों के समर्थन में उपवास रखें। ऐसे सभी लोग जो दिल से किसानों के साथ हैं पर अपनी व्यस्तता के कारण बॉर्डर पर नहीं जा पाए, उनको अब मौका मिला है। वो भी एक दिन का उपवास ज़रूर रखें। जिस तरह से हमारे आंदोलन को उन दिनों में कांग्रेस के द्वारा बदनाम करने की कोशिश की जा रही थी। आज वही कोशिश किसानों के आंदोलन को बदनाम करने के लिए भाजपा और सत्ता पक्ष कर रहा है।

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बता दें कि कल किसानों ने सिंघु बॉर्डर पर बैठक की थी। बैठक में किसानों ने तय किया था कि आंदोलन को आगे अब और तेज किया जाएगा। पाइंट पर अभी हमारा धरना चल रहा है। कल 11 बजे राजस्थान के शाहजहांपुर से किसान दिल्ली की ओर कूच करेंगे। हरियाणा में आज टोल फ्री किया गया है और पंजाब में 1 अक्टूबर से ही टोल प्लाजा फ्री है। 14 दिसंबर को देश में सभी जिला कलेक्टर के ऑफिस के सामने प्रदर्शन होगा। 14 को सुबह 8 से शाम 5 बजे तक हमारे किसान नेता प्रदर्शन स्थलों के मंच से अनशन पर बैठेंगे। हमारा आंदोलन 3 कानूनों पर केंद्रित है, इन्हें हम रद्द कराना चाहते हैं।

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बता दें कि सरकार और किसानों के बीच अब तक तीन बैठकें हो चुकी है, लेकिन अभी तक हुई बैठकें बेनतीजा रहा है। हालांकि सरकार ने किसानों के सामने प्रस्ताव देकर कहा था कि उनकी शंकाओं के आधार पर मंडियों और एमएसपी की बिंदुओं में शंसोधन किया जाएगा। लेकिन किसान अभी भी कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

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