CG ki Baat: रायपुर। चुनावी साल में आग उगलते बयानों के पीछे असल मकसद क्या है…सुर्खियां बनाना, माहौल गर्माना या फिर कोई हिडन चुनावी ऐजेंडा…ये सवाल उठा क्योंकि भाजपा की परिवर्तन यात्रा में शामिल असम के CM हेमंत बिस्वा सरमा ने हिंदुत्व को लेकर सीधे मुख्यमंत्री और गांधी परिवार को चैलेंज किया, जिसके जवाब में प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लेकर उल्टे सरमा को चैलेंज कर दिया है…वैसे इस बहस के मूल में है कौन सच्चा और बड़ा हिंदू है ? जाहिर है इन चैलेंजेस में कांग्रेस के शीर्ष नेता और भाजपा के सबसे बड़े चेहरे को लेकर बहस छिड़ी है जो देर तक और दूर तक जाएगी, मूल सवाल ये इस वक्त हिंदुत्व पर ये बहस क्यों क्या ये सोची समझी रणनीति है?
बीजेपी में हिंदुत्व के सबसे बड़े पोस्टर बॉय असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ये खुला चैलेंज दिया अगर सोनिया और राहुल गांधी हिंदू हैं तो अयोध्या में रामलला के दर्शन करने ले जाएं। फिर पूरी पार्टी उनके सुर में ताल मिलाने लगी।
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हेमंत बिस्वा के बयान के बाद कांग्रेस बौखला गई। ‘हिंदू’ होने की ये चुनौती… और ये लड़ाई… अब दर्शन से मुंडन तक आ गई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हिमंत बिस्वा को चुनौती दे डाली कि पहले वे पीएम मोदी का मुंडन कराएं।
चुनावी साल छत्तीसगढ़ की सियासत में हिंदुत्व पर बयानबाजी के कई मायने हैं। दरअसल 2018 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद हिंदुत्व के एजेंडे पर बीजेपी का एकाधिकार नहीं रहा। ऐन चुनाव से पहले हिंदुत्व पर सियासी लड़ाई छिड़ गई है। दर्शन और मुंडन कराने के चैलेंज वाली पॉलिटिक्स क्या रंग दिखाती है, वक्त को तय करना है।
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