जीसीएमएमएफ को चालू वित्त वर्ष में दहाई अंक में राजस्व वृद्धि की उम्मीद |

जीसीएमएमएफ को चालू वित्त वर्ष में दहाई अंक में राजस्व वृद्धि की उम्मीद

जीसीएमएमएफ को चालू वित्त वर्ष में दहाई अंक में राजस्व वृद्धि की उम्मीद

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Modified Date: November 29, 2024 / 02:56 PM IST
Published Date: November 29, 2024 2:56 pm IST

नयी दिल्ली, 29 नवंबर (भाषा) अमूल ब्रांड के तहत कारोबार करने वाले गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ लिमिटेड (जीसीएमएमएफ) के प्रबंध निदेशक जयेन मेहता ने कहा कि मजबूत मांग के दम पर चालू वित्त वर्ष 2024-25 में राजस्व में दहाई अंक में वृद्धि की उम्मीद है।

जीसीएमएमएफ ने गत वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 60,000 करोड़ रुपये की मांग दर्ज की थी। कारोबार आठ प्रतिशत बढ़कर 59,445 करोड़ रुपये रहा था।

मेहता ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में कहा कि चालू वित्त वर्ष 2024-25 के पहले आठ महीनों में सहकारी समिति ने ताजा दूध, पनीर और आइसक्रीम सहित सभी उत्पाद श्रेणियों में मांग में वृद्धि देखी है।

समूचे वित्त वर्ष के लिए राजस्व परिदृश्य के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘ हमें कारोबार में दहाई अंक में वृद्धि की उम्मीद है।’’

मेहता ने कहा कि जीसीएमएमएफ ने गत वित्त वर्ष में औसतन प्रतिदिन 310 लाख लीटर दूध का प्रसंस्करण किया। इसकी कुल वार्षिक दूध प्रसंस्करण क्षमता करीब 500 लाख लीटर है।

विस्तार योजना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जीसीएमएमएफ ने नई तथा पुरानी परियोजनाओं के जरिये अपनी क्षमता का विस्तार करने के लिए 11,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनायी है।

मेहता ने कहा, ‘‘ हमने 11,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का 80 प्रतिशत पहले ही निवेश कर दिया है।’’

उन्होंने कहा कि जीसीएमएमएफ किसानों के कल्याण के लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

जैविक खाद्य कारोबार के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह अच्छा कर रहा है और ‘‘ हमने कई जैविक उत्पाद पेश किए हैं।’

जीसीएमएमएफ दुनिया की सबसे बड़ी दुग्ध सहकारी संस्था है। यह गुजरात के 18,600 गांवों में 36 लाख किसानों से जुड़ी है और इसके 18 सदस्य संघ प्रतिदिन 300 लाख लीटर दूध खरीदते हैं।

इंटरनेशनल फार्म कम्पैरिजन नेटवर्क (आईएफसीएन) के अनुसार दूध प्रसंस्करण के मामले में यह दुनिया की शीर्ष 20 दुग्ध कंपनियों में आठवें स्थान पर है।

घरेलू बाजार के अलावा जीसीएमएमएफ करीब 50 देशों को दुग्ध उत्पाद निर्यात कर रही है।

भाषा निहारिका रमण

रमण

 

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