मंदसौर: नोटबंदी की मार और सरकार की बेरहम सिस्टम से जनता परेशान
Last Update: 22 Dec 2016 18:57
   

मंदसौर। नोटबंदी से देश को कितना फायदा होने वाला है, ये तो वक्त ही बताएगा। लेकिन फिलहाल जो जनता परेशान हो रही है, उनकी तकलीफ देखने और सुनने वाला कोई नहीं। हम आपको बताते हैं मंदसौर की एक ऐसी ही दास्तां, जहां एक बुजुर्ग और उसके बेटे की जिंदगी में नोटबंदी ने ऐसा दर्द भरा है। जिसे देखकर हर कोई सिहर उठा।

मंदसौर का भारतीय स्टेट बैंक और इस ब्रांच के आगे खड़ी एक ऑटो में लेटा बीमार बुजुर्ग। 86 साल का ये शख्स शांतिलाल है। जिसे नोटबंदी से पहले यानी आठ नवंबर से पहले पैरालिसिस का अटैक आया और तभी से वो अस्पताल में भर्ती हैं। इनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया है और ये ठीक से बोल भी नहीं पाते।

लेकिन बीमार पिता के इलाज के लिए जब बेटे राजेश जैन के पास नए नोट नहीं थे, तो वे बैंक पहुंचे। जहां उन्हें कहा गया कि 40 हजार रुपए के पुराने नोट तभी जमा होंगे, जब खाताधारक खुद बैंक आएगा।  इलाज कराने की मजबूरी और रुपए नहीं होने की लाचारी में बेटे को मजबूरन अपने बीमार पिता को यूं ऑटो में बैंक लाना पड़ा।

लेकिन तीन घंटे तक बैंक के बाहर यूं ही उनके पिता लेटे रहे और बैंक मैनेजर ने कह दिया कि जब तक खाताधारक खुद नहीं बोलेगा ये रुपए उनके हैं, तब तक रुपए जमा नहीं होंगे। आखिरकार बिना रुपए जमा कराए ही बुजुर्ग शख्स को ऑटो से वापल ले जाया गया।  मामले का पता चलने पर जब मीडिया ने बैंक मैनेजर दिलीप कुमार से सवाल किए, तो उन्होंने उनसे भी बदसलूकी की।

बैंक के संवेदनहीन रवैये को लेकर प्रशासन ने जांच की बात कही है। देशहित के लिए नोटबंदी के फैसले के साथ पूरा देश परेशान होकर भी सरकार के साथ खड़ा है। लेकिन सरकार के बेरहम सिस्टम की ऐसी संवेदनहीनता से लोगों को जो दर्द मिल रहा है, उसकी सजा भी तय होनी चाहिए।

Last Update: 22 Dec 2016 18:57
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